खरीदार पेमेंट नहीं कर रहा? छोटा बिज़नेस क्या कर सकता है
शुरुआत लिखित रिमाइंडर से करें जिसमें इनवॉइस, रकम और ड्यू डेट लिखी हो, फिर एक डेडलाइन के साथ औपचारिक डिमांड भेजें। अगर आप Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं, तो MSMED Act के अनुसार खरीदार को तय अवधि में पेमेंट करना होगा, और माल या सर्विस स्वीकार करने के 45 दिन से ज़्यादा देर नहीं हो सकती; आप सरकार के MSME Samadhaan पोर्टल पर देरी से पेमेंट का केस दर्ज कर सकते हैं। बड़ी रकम के लिए अगले कदम हैं वकील का लीगल नोटिस और फिर सिविल केस (या अगर उनका चेक बाउंस हुआ हो तो धारा 138 की शिकायत)।
स्टेप बाय स्टेप
- लिखित रिमाइंडर भेजें। इनवॉइस और डिलीवरी का प्रूफ़ साथ लगाएँ। रकम, ड्यू डेट और पेमेंट कैसे करना है, यह लिखें। WhatsApp या ईमेल चलेगा; उसकी कॉपी रखें।
- कॉल करें, फिर लिखकर पक्का करें। अगर वे फ़ोन पर कोई तारीख बताते हैं, तो उसी दिन मैसेज भेजें: “जैसा बात हुई, आप ₹… की पेमेंट … तक करेंगे”। लिखित वादा आगे काम आता है।
- औपचारिक डिमांड भेजें। अपने लेटरहेड पर एक छोटा पत्र, जिसमें इनवॉइस की लिस्ट, कुल बकाया रकम और साफ़ डेडलाइन हो (जैसे 7 दिन)।
- MSME Samadhaan का इस्तेमाल करें, अगर आप Udyam रजिस्ट्रेशन वाले माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं (नीचे देखें)।
- लीगल नोटिस। जब रिमाइंडर से जवाब न आए, तब वकील के नोटिस से अक्सर जवाब आ जाता है। कोर्ट जाने से पहले आम तौर पर यही कदम होता है।
- कोर्ट या आर्बिट्रेशन। सिविल रिकवरी केस, या अगर आपके एग्रीमेंट में लिखा हो तो आर्बिट्रेशन। अगर उन्होंने चेक से पेमेंट किया और वह बाउंस हो गया, तो देखें चेक बाउंस होने पर क्या करें।
- सही रिकॉर्ड रखें। REFFNET पर आप तथ्यों और अपने प्रूफ़ के साथ विवाद दर्ज कर सकते हैं। बिज़नेस उसे देखता है और सबके सामने जवाब दे सकता है, और दूसरे सप्लायर भरोसा करने से पहले जान सकते हैं। सिर्फ़ वही तथ्य लिखें जो आप साबित कर सकें।
MSME का 45 दिन का नियम और MSME Samadhaan
- किसकी मदद करता है: Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़, जो भारत में किसी भी खरीदार को बेचते हैं।
- नियम: MSMED Act की धारा 15 के तहत खरीदार को तय तारीख तक पेमेंट करना होगा, और यह तारीख माल या सर्विस स्वीकार करने से 45 दिन से ज़्यादा नहीं हो सकती। कोई लिखित एग्रीमेंट न हो तो सीमा 15 दिन है।
- ब्याज: अगर वे देर से पेमेंट करते हैं, तो धारा 16 के तहत आप RBI द्वारा नोटिफ़ाई किए गए बैंक रेट के तीन गुना पर, मासिक रेस्ट के साथ चक्रवृद्धि (कंपाउंड) ब्याज क्लेम कर सकते हैं।
- क्लेम कैसे करें: MSME Samadhaan पोर्टल (samadhaan.msme.gov.in) पर केस दर्ज करें। केस आपके राज्य की Micro and Small Enterprises Facilitation Council के पास जाता है, जो पहले सुलह (कंसिलिएशन) की कोशिश करती है और फिर आर्बिट्रेशन।
- खरीदार को इसकी परवाह क्यों है: असेसमेंट ईयर 2024–25 से, Income-tax Act की धारा 43B(h) के तहत अगर माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ को बकाया पेमेंट MSMED की समय-सीमा के बाद किया जाता है, तो खरीदार उसे सिर्फ़ उसी साल डिडक्ट कर सकता है जिस साल पेमेंट असल में किया गया। विनम्रता से इसका ज़िक्र करने पर अक्सर पेमेंट जल्दी हो जाता है।
अक्टूबर 2026 तक के नियम। आपके मामले में ये कैसे लागू होते हैं, यह अपने CA या वकील से पूछें।
अगली बार ऐसा न हो
- पेमेंट की शर्तें परचेज़ ऑर्डर या कोटेशन पर लिखित में तय करें।
- हर खरीदार के लिए क्रेडिट लिमिट तय करें और नए खरीदारों से कुछ एडवांस लें।
- पहले खरीदार को चेक करें: GST स्टेटस और फ़ाइलिंग रिकॉर्ड और दूसरे बिज़नेस क्या कहते हैं।
- REFFNET ऐप में अपने रेगुलर खरीदारों को वॉच करें: अगर वे GST रिटर्न फ़ाइल करना बंद करें या उन पर नए विवाद आएँ, तो आपको अलर्ट मिलता है।
लोग जो सवाल पूछते हैं
क्या देर से पेमेंट पर ब्याज ले सकते हैं?
अगर आप Udyam पर रजिस्टर्ड माइक्रो या स्मॉल एंटरप्राइज़ हैं, तो MSMED Act ड्यू डेट के बाद RBI बैंक रेट के तीन गुना पर चक्रवृद्धि ब्याज देता है। वरना ब्याज इस पर निर्भर करता है कि आपके इनवॉइस या एग्रीमेंट में क्या लिखा है।
क्या MSME Samadhaan के लिए Udyam रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है?
हाँ। यह पोर्टल Udyam रजिस्ट्रेशन वाले माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज़ के लिए है, और केस भारत में कहीं के भी खरीदारों से मिलने वाले पेमेंट के बारे में होता है।
क्या REFFNET पर किसी खरीदार के बारे में विवाद डालना सुरक्षित है?
सिर्फ़ वही तथ्य लिखें जो आप साबित कर सकें (इनवॉइस, डिलीवरी, मैसेज) और प्रूफ़ साथ लगाएँ। खरीदार को सूचना मिलती है और वह अपना जवाब पब्लिश कर सकता है। गाली-गलौज या अंदाज़े न लिखें।